॥ श्रीगणेशआरती ॥

॥ ॐ ॥

॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ ध्रुव ॥

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी ।

माथे सिन्दूर सोहे मूषक की सवारी ॥ १ ॥

अन्धन को आँख देत कोढ़िन को काया ।

बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया ॥ २ ॥

हार चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा ॥ ३ ॥

दीनन की लाज रखो शम्भुसुतवारी ।

कामना को पूर्ण करो जगबलिहारी ॥ ४ ॥

॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥

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